कल शाम को सब्जी लेते समय,सब्जी वाले ने कोचिंग के बारे में पूछा -.क्या कोचिंग में पढ़ लेने के बाद बच्चा प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त कर लेता है .हम लोगो ने कहा -की कोई गारंटी नहीं है .वह चला गया .लेकिन मेरे मन में यह बिचार आने लगा की हमारी शिछा ववस्था बच्चो को इतना कमजोर क्यों बना देती है ,की हाई स्कूल
पास करने के बाद उन्हें कोचिंग की जरूरत पड़ती है .जिन बच्चो कों प्रराम्भ से सही ज्ञान सभी बिषयो में मिल जाता है ,और बच्चे उसे ग्रहण कर लेते है उन्हें कोचिंग की जरूरत नहीं पड़ती है . हमारे बच्चो को बचपन से ही स्पून फिद्डिंग की आदत डाल दी जाती है.न उन्हें समझा जाता है ,न उन्हें बिषय समझाया जाता है.केवल रटाया जाता है .काफी परिश्रम के बाद भी बच्चा जो प्राप्त करना चाहता है वह प्राप्त नहीं कर पाता है .जानकारियों की भी कमी होती है .इन सब अभाओ के कारण सही समय से बच्चा अपने गोल को प्राप्त नहीं कर पाता है .पाता नहीं ये सारी कमिया कब पूरी हो पाएंगी?अभिभावक भी अपने बच्चो को समझने की कोशिष नहीं करते है .केवल दुसरो की देखा देखि करते है.आशा है की आने वाले समय में सुधार अवश्य होगा.

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