Tuesday, July 26, 2011

.याद आया बचपन

मेरे सामने वाले मकान में एक परिवार रहता है .उसमे दो छोटे -छोटे बच्चे हैं .उनसे मेरी दोस्ती हो गयी है .स्कूल से आने के बाद teacher की सारी बाते बताते है .अपने दोस्तों की बाते बताते है .उनसे बात कर अच्छा लगता है आज लुका -छिपी खेलते -खेलते मेरे घर में आये और आलमारी के पीछे छोटा  छुप गया .कुछ देर खोजने के बाद मिल गया.अलमारी के पीछे उसे एक चवन्नी मिली.उसने वह सिक्का मेरे को दे दिया.कुछ देर और खलने के बाद अपने घर चला गया.वह सिक्का हाथ में ले कर मै देखती रही और सोचती रही.अब वह सिक्का गुजरे ज़माने की चीज हो गयी .कुछ देर के लिए मैं अपने बचपन में चली गयी .हमारे गांव में दशहरा का मेला लगता था मनोरंजन का साधन कम होने की वजह से दूर -दूर से रिशतेदारी के लोग आते थे .सभी बड़े अपने से छोटे को मेला देखेने के लिए एक या दो चवन्नी के सिक्के देते थे.चवन्नी हाथ में आते ही हम सब खुश हो जाते थे और कल्पना में मेला की सारी चीजी खरीद लेते थे .लड़के अपने लिए पतंग,डोरी और ltayin खरीदते थे बाकि पैसो से पिकनिक मनाते थे .लड़किया अपने प्रकीर्त के अनुसार गुडिया,गुडयेऔर खलने का सारा सामान खरीदती थी.बाकि बचे पैसे माँ को सहेजने के लिए दे देती थी आज भी बचपन यादआता है साथ में चवन्नी भी .अब चवन्नी का चलन बंद हो गया है .लगता है इसके साथ ही  एक युग समाप्त हो गया .याद आया बचपन           

Saturday, July 23, 2011

.पर्यावरण

आज सुबह मैंने समाचार पत्र में पढ़ा की प्रदूषण को कैसे कम किया जाय.मै एक घरेलु महिला हूँ .मेरा मानना है की  हम लोग भी योगदान कर सकते है .जैसे घर में तुलसी का  पोधा लगा कर.यह छोटा पोधा प्रदुषण को कम करता है .इसलिय सदियों से पूजनीय है .दवा के काम में भी आता है .बहुत आसानी से हर घर में लगाया जा सकता है .घरो में पोधो को उगाने से सकारात्मक उर्जा आती है .तथा हमारे छोटे बच्चे  भी अपने आप कुछ करने का सोचते है .हम लोग पलोथिन बैग के स्थान पर कपढ़े के सिले हुई बैग का इस्तेमाल कर सकते है .इस तरह की सावधानी से प्रदुषण को काम करने में सहायता कर सकते है .कुछ लोग कचरे को जला देते है .जलाने से जो कार्बन निकलता है वह हमारे ओक्ससिजन को कम करता है .जो हमारी प्राण वॉई है . उस कचरे को किसी गढ़े में इकठा कर कम्पोस्ट खाद बनाई जा सकती है .जो हमारे पोअधो के लिए जरुरी है .पर्यावरण

Wednesday, June 29, 2011

.भारतीय शिछा

कल शाम को सब्जी लेते समय,सब्जी वाले ने  कोचिंग के बारे में पूछा -.क्या  कोचिंग में पढ़ लेने के बाद  बच्चा    प्रतियोगिता  में सफलता प्राप्त  कर लेता है .हम लोगो ने कहा -की कोई गारंटी नहीं है .वह चला गया .लेकिन मेरे मन में यह बिचार आने लगा की हमारी शिछा ववस्था  बच्चो  को इतना कमजोर क्यों बना देती है ,की हाई स्कूल 
पास करने के बाद उन्हें कोचिंग की जरूरत पड़ती  है .जिन बच्चो कों  प्रराम्भ  से सही  ज्ञान   सभी बिषयो में मिल जाता है ,और बच्चे उसे ग्रहण कर लेते है उन्हें कोचिंग की जरूरत नहीं पड़ती  है . हमारे बच्चो को  बचपन  से ही स्पून फिद्डिंग की आदत डाल दी जाती है.न उन्हें समझा जाता है ,न उन्हें बिषय समझाया जाता है.केवल रटाया जाता है .काफी परिश्रम के बाद भी बच्चा जो प्राप्त करना चाहता है वह प्राप्त नहीं कर पाता है .जानकारियों की भी कमी होती है .इन सब अभाओ के कारण सही समय से बच्चा अपने गोल को प्राप्त नहीं कर पाता है .पाता नहीं ये सारी कमिया कब पूरी हो पाएंगी?अभिभावक भी अपने बच्चो को समझने की कोशिष नहीं करते है .केवल दुसरो की देखा देखि करते है.आशा है की आने वाले समय में सुधार अवश्य होगा.


Saturday, June 25, 2011

.सरकार की चर्चा घर -घर में

मै एक गृहणी  हूँ .घर के काम-काज के बाद,देश -दुनिया में क्या हो रहा है ,यह जानने की उत्सुकता मेरे मन में रहती है.इसलिए मै न्यूज़ चैनल ज्यादा देखती हूँ .आज diesel ,कुकिंग गैस और केरोसेने के दाम बढ़ गए हैं .यह सुन कर मै सोचने लगी की ,क्या सरकार अपने किये हुए घोटालों की भरपाई ,प्रतिदिन उपयोग में आने वाली जरुरी सामानों की कीमतों में बेतहाशा मूल्य  ब्रिधी कर के अपनी बित्त्य घाटा कर पूरा  लेगी ? हो सकता है.
  सरकार रूपी जहाज में इतने  छिद्र  क्यों है?पहले जनता के पैसे  से घोटाला  करो ,फिर जनता के पैसे से घोटाले -बाजों को पकड़ो ,उनको जेल में डालो और पैसे  की कमी  को मूल्य बड़ा कर खजाने को भरो.ऐसा  नहीं होना  चाहिए .हमें गान्धी जी के  बताये हुए रास्ते पर चलाना  चाहिए .ताकि देशा की उनंती हो, और स्वस्थ मानसिकता वाले,संतुलित समाज का निर्माण हो सके.आज आवश्कता इसी बात की है .सरकार की चर्चा घर -घर में  


Thursday, June 23, 2011

आधी आबादी

आज सुबह मै चाय पी रही थी और प्रातः कालीन  समाचार सुन रही थी. एक प्रमुख समाचार यह था की इस मानसून सत्र में महिला  आरक्षण बिल सरकार संसद में पेश करेगी .यह बिल राज्यसभा में पहले ही पारित हो चूका है . अब लोकसभा से पारित होना है . लेकिन सरकार को बिरोधी दलों से डरहै की वह इस बिल के पास होने में गतिरोध पैदा करेंगे.

यह समाचार सुनने के बाद मेरे मन में प्रश्न उठा की 21st शताब्दी में पहुँचने के उपरांत भी देश की आधी आबादी, अर्थात महिलायें एवं बालिकाएं आज भी किस तरह का जीवन व्यतीत करने के लिए बाध्य हैं? उनकी दशा में कुछ सुधार लाने के लिए यह नितांत आवश्यक है की यह बिल पास हो. हमें एक स्वस्थ्य समाज का निर्माण करना है तो महिला और पुरुष दोनों की समान सह भागिता आवश्यक  है .

सर्विस हो या बिज़नस, आर्ट हो या समाज सेवा, हर  क्षेत्र  में महिलायें आगे आयी हैं. लेकिन उन्हें और प्रगति करना है ताकी एक संतुलित समाज का निर्माण हो सके .बहुत से लोगो का यह मानना है की स्त्रियों के आ जाने से उनके  अवसरों में कमी आती है परन्तु ऐसा नहीं है .  आवश्यकता है दृष्टि कोण बदलने की.

Saturday, June 18, 2011

इलेक्ट्रोनिक चर्चा घर घर में

आज बहुत दिनों के बाद अपने ब्लॉग पर वापस आई हूँ . कल मेरी छोटी चचेरी बहन से फ़ोन पर बात हुई. वो कंप्यूटर और इन्टरनेट के बारे में बहुत उत्सुक दिख रही थी. तब मुझे पहली बार एहसास हुआ की ये कितना बड़ा माध्यम है. आज लोग ऑरकुट और फसबूक के बारे में गाँव गाँव तक में बात करते हैं. और दिलचस्प बात ये  है की इसमें केवल युवा वर्ग ही सम्मिलित नहीं है. बेशक उनकी हिस्सेदारी सबसे बड़ी हो लेकिन उनके अलावा आज की तारीख में मध्यम और प्रोढ़ आयु वर्ग के लोग रूचि रख रहे हैं . आवश्यकता इस बात की है की हमारे बच्चे और अन्य युवा साथी सामने आये और अपनी इस इलेक्ट्रोनिक दुनिया में हमारा परिचय और प्रगाढ़ करे.