आज सुबह मै चाय पी रही थी और प्रातः कालीन समाचार सुन रही थी. एक प्रमुख समाचार यह था की इस मानसून सत्र में महिला आरक्षण बिल सरकार संसद में पेश करेगी .यह बिल राज्यसभा में पहले ही पारित हो चूका है . अब लोकसभा से पारित होना है . लेकिन सरकार को बिरोधी दलों से डरहै की वह इस बिल के पास होने में गतिरोध पैदा करेंगे.
यह समाचार सुनने के बाद मेरे मन में प्रश्न उठा की 21st शताब्दी में पहुँचने के उपरांत भी देश की आधी आबादी, अर्थात महिलायें एवं बालिकाएं आज भी किस तरह का जीवन व्यतीत करने के लिए बाध्य हैं? उनकी दशा में कुछ सुधार लाने के लिए यह नितांत आवश्यक है की यह बिल पास हो. हमें एक स्वस्थ्य समाज का निर्माण करना है तो महिला और पुरुष दोनों की समान सह भागिता आवश्यक है .
सर्विस हो या बिज़नस, आर्ट हो या समाज सेवा, हर क्षेत्र में महिलायें आगे आयी हैं. लेकिन उन्हें और प्रगति करना है ताकी एक संतुलित समाज का निर्माण हो सके .बहुत से लोगो का यह मानना है की स्त्रियों के आ जाने से उनके अवसरों में कमी आती है परन्तु ऐसा नहीं है . आवश्यकता है दृष्टि कोण बदलने की.
यह समाचार सुनने के बाद मेरे मन में प्रश्न उठा की 21st शताब्दी में पहुँचने के उपरांत भी देश की आधी आबादी, अर्थात महिलायें एवं बालिकाएं आज भी किस तरह का जीवन व्यतीत करने के लिए बाध्य हैं? उनकी दशा में कुछ सुधार लाने के लिए यह नितांत आवश्यक है की यह बिल पास हो. हमें एक स्वस्थ्य समाज का निर्माण करना है तो महिला और पुरुष दोनों की समान सह भागिता आवश्यक है .
सर्विस हो या बिज़नस, आर्ट हो या समाज सेवा, हर क्षेत्र में महिलायें आगे आयी हैं. लेकिन उन्हें और प्रगति करना है ताकी एक संतुलित समाज का निर्माण हो सके .बहुत से लोगो का यह मानना है की स्त्रियों के आ जाने से उनके अवसरों में कमी आती है परन्तु ऐसा नहीं है . आवश्यकता है दृष्टि कोण बदलने की.

I completely agree with you. If we have to make holistic development as a society and a nation, women should be accorded a greater platform both in education and work opportunities.
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