मेरे सामने वाले मकान में एक परिवार रहता है .उसमे दो छोटे -छोटे बच्चे हैं .उनसे मेरी दोस्ती हो गयी है .स्कूल से आने के बाद teacher की सारी बाते बताते है .अपने दोस्तों की बाते बताते है .उनसे बात कर अच्छा लगता है आज लुका -छिपी खेलते -खेलते मेरे घर में आये और आलमारी के पीछे छोटा छुप गया .कुछ देर खोजने के बाद मिल गया.अलमारी के पीछे उसे एक चवन्नी मिली.उसने वह सिक्का मेरे को दे दिया.कुछ देर और खलने के बाद अपने घर चला गया.वह सिक्का हाथ में ले कर मै देखती रही और सोचती रही.अब वह सिक्का गुजरे ज़माने की चीज हो गयी .कुछ देर के लिए मैं अपने बचपन में चली गयी .हमारे गांव में दशहरा का मेला लगता था मनोरंजन का साधन कम होने की वजह से दूर -दूर से रिशतेदारी के लोग आते थे .सभी बड़े अपने से छोटे को मेला देखेने के लिए एक या दो चवन्नी के सिक्के देते थे.चवन्नी हाथ में आते ही हम सब खुश हो जाते थे और कल्पना में मेला की सारी चीजी खरीद लेते थे .लड़के अपने लिए पतंग,डोरी और ltayin खरीदते थे बाकि पैसो से पिकनिक मनाते थे .लड़किया अपने प्रकीर्त के अनुसार गुडिया,गुडयेऔर खलने का सारा सामान खरीदती थी.बाकि बचे पैसे माँ को सहेजने के लिए दे देती थी आज भी बचपन यादआता है साथ में चवन्नी भी .अब चवन्नी का चलन बंद हो गया है .लगता है इसके साथ ही एक युग समाप्त हो गया .याद आया बचपन
Tuesday, July 26, 2011
Saturday, July 23, 2011
.पर्यावरण
आज सुबह मैंने समाचार पत्र में पढ़ा की प्रदूषण को कैसे कम किया जाय.मै एक घरेलु महिला हूँ .मेरा मानना है की हम लोग भी योगदान कर सकते है .जैसे घर में तुलसी का पोधा लगा कर.यह छोटा पोधा प्रदुषण को कम करता है .इसलिय सदियों से पूजनीय है .दवा के काम में भी आता है .बहुत आसानी से हर घर में लगाया जा सकता है .घरो में पोधो को उगाने से सकारात्मक उर्जा आती है .तथा हमारे छोटे बच्चे भी अपने आप कुछ करने का सोचते है .हम लोग पलोथिन बैग के स्थान पर कपढ़े के सिले हुई बैग का इस्तेमाल कर सकते है .इस तरह की सावधानी से प्रदुषण को काम करने में सहायता कर सकते है .कुछ लोग कचरे को जला देते है .जलाने से जो कार्बन निकलता है वह हमारे ओक्ससिजन को कम करता है .जो हमारी प्राण वॉई है . उस कचरे को किसी गढ़े में इकठा कर कम्पोस्ट खाद बनाई जा सकती है .जो हमारे पोअधो के लिए जरुरी है .पर्यावरण
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